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National Unity Day( राष्ट्रीय एकता दिवस)

सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती

भारत के राष्ट्रपति ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य पर भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में उनकी अविस्मरणीय भूमिका के सम्मान में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसे राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्तूबर) के रूप में मनाया जाता है।

राष्ट्रीय एकता दिवस क्या है?

  • परिचय: 
    • राष्ट्रीय एकता दिवस पटेल के मूल्यों– एकता, अखंडता और समावेशिता का स्मरणोत्सव है।
      • संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों में व्यापक विविधता वाले देश में यह दिवस भारत के लोगों के बीच एकजुटता की भावना को बढ़ावा देने के महत्त्व पर ज़ोर देता है। 
    • यह दिवस नागरिकों को एकजुट होकर चुनौतियों का समाधान करने, विविधता का उत्सव मनाने और राष्ट्र के भीतर सद्भाव को बढ़ावा देने के लिये चिंतन करने के लिये प्रोत्साहित करता है।
  • स्टैच्यू ऑफ यूनिटी:
    • 31 अक्तूबर 2018 को  सरदार वल्लभभाई पटेल के सम्मान में विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का उद्घाटन गुजरात के केवडिया में किया गया, जिसकी ऊँचाई 182 मीटर (600 फीट) है।
      • नर्मदा नदी और सरदार सरोवर बाँध (कंक्रीट की मात्रा की दृष्टि से विश्व का दूसरा सबसे बड़ा भाराश्रित बाँध) के सामने, यह प्रतिमा साधु बेट द्वीप पर स्थित है।
    • वर्ष 2020 में भारत की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के आठ अजूबों की सूची में शामिल किया गया था।

२०१४ से हर वर्ष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के दिन राष्टीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह दिन महान, कर्मठ और दृढ़ व्यक्तिव वाले पटेल जी को समर्पित है जिन्होंने बिखरे रियासतों को भारत में विलय कर एक अखंड भारत का निर्माण कराया जो बाह्य शक्तियों द्वारा जैसे मुगलों, अंग्रेजों के फुट डालो राज करो नीतियों से संकुचित होते जा रहा था।

इस दिन स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थान और संग्रहालयों के तरह हमारे पुलिस विभाग में भी ” Run For Unity” कार्यक्रम माननीय पुलिस आयुक्त इलाहाबाद श्री मनीष शांडिल्य जी द्वारा झंडा फहरा कर आयोजित किया गया। राष्ट्रीय एकता दिवस का थीम व संदेश है एक भारत श्रेष्ठ भारत

हम सभी इस वर्ष सरदार पटेल जी के जयंती पर अखंड भारत के संकल्प की शपथ लिए जिसे हम सबको आत्मसार भी करना चाहिए-

” मैं सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा करता/करती हूँ कि मैं राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित करूँगा/करूँगी और अपने देशवासियों के बीच इस संदेश को फैलाने के लिए अथक प्रयास करूँगा/करूँगी। मैं यह प्रतिज्ञा अपने देश के एकीकरण की भावना से लेता/लेती हूँ, जो सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदर्शिता और कार्यों से संभव हुआ। मैं अपने देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में अपना योगदान देने का भी सत्यनिष्ठा से संकल्प लेता/लेती हूँ।”

एकता दिवस का उद्देश

  •  देश की एकता और अखंडता को बढ़ावा देना।
  • सरदार पटेल के योगदान को सम्मानित करना। 
  • देशवासियों में एकता और भाईचारे की भावना को प्रोत्साहित करना

संदेश देश के नौजवानों के नाम

आज जब सोशल मीडिया, राजनीति और विचारधाराएं लोगों को बांट रही हैं, राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि भारत की असली पहचान उसकी विविधता में निहित है यानी भाषा, संस्कृति, धर्म, परिधान सब अलग, लेकिन आत्मा एक। यह दिन हर भारतीय के भीतर यह भावना जगाता है कि हम सब मिलकर ही भारत हैं और एकता में ही शक्ति है।

क्यों मनाया जाता है ३१ अक्टूबर को ही राष्ट्रीय एकता दिवस ?

“भारत के लौह पुरुष” सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती को ही राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद भारत को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस लिए इस दिन को उनके जयंती के उपलक्ष्य में चुना गया। उन्होंने 565 रियासतों का विलय उस समय किया जब भारत एक विषम परिस्थिति जैसे भारत का विभाजन, भुखमरी, रोजगार के अनेकों दिक्कतों, विश्व में अपने देश को नए मुकाम तक पहुंचाने जैसे अनेकों गतिविधियों से गुजर रही थी।

पटेल जी ने भारत में लोगों के बीच राष्ट्रीय एकता और सद्भाव को बढ़ाने के लिए अपने आपको सर्वत्र न्योछावर किया, अतः भारत सरकार का इनके जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने का घोषणा करना एक अच्छी पहल है।

 

सरदार वल्लभभाई पटेल जी के बारे में

प्रारंभिक जीवन

इनका जन्म 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था और उन्होंने नाडियाड हाई स्कूल और मिडिल टेम्पल, लंदन से शिक्षा प्राप्त की । उन्होंने अपना करियर बैरिस्टर के रूप में शुरू किया।

अपने शुरुआती दिनों में इन्होंने अहमदाबाद नगर निगम में स्वच्छता आयुक्त के रूप में कार्य करते हुए शहर के हर हिस्सों में बिजली, जल निकासी अन्य सुविधाओं पर ध्यान दिया जहां से इनका राजनीतिक जीवन की भूमिका बनी।

इन्होंने शिक्षकों की मान्यता और वेतन के लिए संघर्ष करते हुए कई प्रमुख सुधार किए।

 

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका

पटेल जी असहयोग, सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलनों में सक्रिय रूप से शामिल थे और कई बार अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार भी किया। 1923 में जब गांधी जी को जेल हुई, तो उन्होंने नागपुर में सत्याग्रह आंदोलन का नेतृत्व और आयोजन किया।

इस दौरान, पटेल कांग्रेस पार्टी में आगे बढ़े और 1931 के कराची अधिवेशन के दौरान इसके अध्यक्ष चुने गए, जिसमें कांग्रेस ने ऐतिहासिक कराची प्रस्ताव पारित किया।

संविधान निर्माण में योगदान

निर्माण के प्रारंभिक चरणों में, विशेषकर जब सभा मौलिक अधिकारों और अल्पसंख्यक अधिकारों पर उप-समितियों की अंतरिम रिपोर्टों पर विचार कर रही थी, बहसों में उनका हस्तक्षेप विशेष रूप से प्रमुख था।

स्वतंत्रता बाद के योगदान

भारत के पहले गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री रहे पटेल जी में विभाजन के दौरान शरणार्थियों के लिए राहत कार्यों का आयोजन किया। जुलाई 1947 के बाद वे राज्य मंत्री और 1948 के बाद गृह एवं राज्य मंत्री के पद पर रहे।

  • पटेल जी का निधन 15 दिसम्बर 1950 को हुआ।

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