अनोख़ा पिता
अनोख़ा पिता आज शाम मैं घर से निकला और शहर के मिठे-मिठे शर्द के मिजाज का आनंद लेते हुए, चाँद […]
अनोख़ा पिता आज शाम मैं घर से निकला और शहर के मिठे-मिठे शर्द के मिजाज का आनंद लेते हुए, चाँद […]
*फ़िद और साशा दो काल्पनिक नाम है जिसका प्रयोग लेखक अपने सभी कहानियों में करता रहेगा। फ़िद – एक मनमौजी
फ़िद – साशा कितने बजे है। साशा – अभी तो सुबह के 07:00 बज रहे है। फ़िद – आज तो