Welcome

कीमती वक्त

वक्त जो अनमोल है, उसका सदुपयोग करो।

बहुत कीमती था वो वक्त, जब उससे मैं मिला था।

कहने को तो बहुत आसान करतब दिखाता था, पर बहुत मेहनत से परिवार के लिए कमाता था।

मैं भी रूका था उसका करतब नहीं तमाशा देखने, था तो वो तमाशा ही लेकिन लग रहा था करतब जैसे।

दो आँखें, एक मुँह, दो हाथ, दो पैर, था तो वो इंसान जैसे।

वो अकेला, दो बच्चे बिन मां के...

बाप कमाता बच्चों के लिए, रोटी लाता बच्चों के लिए, मुस्कुरा देता हर गम पर वो।

कभी ना होता नाराज अपने हालात पर वो।

बातों का बेमिसाल कलाकार था वो, अपाहिज बच्चें को था पालता, सारी खुशियां बटोर कर लाता, अद्भुत बाप था वो।

बहुत कहने पर भी उसने अपना नंबर नहीं दिया, बोला अपने हालात आपकों क्या ही सुनाऊंगा, रो दूंगा पर कुछ कह नही पाऊंगा।

पहली बार मैं किसी इंसान से मिला था, मिला बहुत सुकून ऐसे एक परिवार से मिला था।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *