*फ़िद और साशा दो काल्पनिक नाम है जिसका प्रयोग लेखक अपने सभी कहानियों में करता रहेगा।
फ़िद – एक मनमौजी किस्म का लड़का है, जो अपना जीवन अनेकों संघर्षों के बीच खुद को एक सफल व्यक्ति बनाने के कोशिश में लगा रहा।सफल व्यक्ति बनने के बाद वो अपने से जुड़े लोगों को साथ में उत्कृष्ट पद तक पहुंचाने के लिए निरंतर उनसे जुड़ा रहा।
फ़िद का आध्यात्मिकता के तरफ रुझान शून्य था, वो हर महीने जो तनख्वाह मिलता उसे अपने परिवार को खर्च के लिये देता, दीन दुखिया की मदद करता, मांस मदिरा का सेवन करता।
आध्यात्मिक ज्ञान ना होने के कारण फ़िद सफल व्यक्ति होने के बाद भी एक अच्छा इंसान नहीं बन पा रहा था।
एक दिन फ़िद का मुलाकात एक सिंपल एंड सोबर व्यक्ति साशा से हुआ जो दिखने में तो बहुत ही साधारण, लेकिन समझ में प्रखंड विद्वान लग रहा था।
साशा ने अपने पहले मुलाकात में जीवन क्या है के बारे में फ़िद को विस्तृत जानकारी दिया।
दूसरे मुलाकात में मानव जन्म क्यों मिला के बारे में बताया।
तीसरे मुलाकात में दुखो का कारण कौन होता है के बारे में बताया।
फ़िद को साशा के साथ समय बिताना अच्छा लगने लगा, फ़िद जब भी साशा से मिलता साशा उसे जीवन के बारे में एक नई नई चीजों के बारे में बताता।
साशा की एक खास बात थी कि वो अपने हर स्टेटमेंट के बाद प्रश्न चिन्ह छोड़ जाता था जो फिद को उसके बारे में और जानकारी इकट्ठा करने व रुचि पैदा करने में मदद करता था।
अब साशा और फिद दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे, साशा ने कभी भी फ़िद से मांस-मदिरा छोड़ने को नहीं कहा। फिद जब भी मांस मदिरा करता साशा उसके साथ ही बैठता था, लेकिन साशा के संगत ने, मानवतापूर्ण व्यवहार ने, फ़िद के अंदर आध्यात्मिकता का ज्ञान उजागर किया और धीरे धीरे फ़िद अपने व्यसन को छोड़ आध्यात्मिक यात्रा पर निकल पड़ा।
निष्कर्ष —
साशा ने कभी भी फिद को उसके निजी जीवन में कोई भी परिवर्तन के लिए नहीं कहां। वो केवल जीवन की अनोखी घटना के बारे में चर्चा करता था।
साशा के संगत, हर कार्य में निपुणता, के कारण ही फ़िद के अंदर आध्यात्मिक सोच पनप सकी और वो आध्यात्मिक यात्रा पर निकल पड़ा।
” जीवन में ये बहुत जरूरी है कि हम किसने साथ दैनिक जीवन के वक्त व्यतीत/साझा कर रहे है।”
अच्छी संगत ऊंचे मकाम तक ले जाती है, बुरी संगत दोजख तक ले जाती है।

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Wah….what a story . 😭
Really insightful and intriguing.