
जब नेताजी ने पहचाना असली हिटलर
‘जब नेताजी ने पहचाना असली हिटलर’ की कहानी एक लोकप्रिय किस्सा है, जो बताता है कि हिटलर ने अपने कई हमशक्लों (body doubles) को नेताजी से मिलवाया, लेकिन नेताजी ने अपनी तेज नजर और हिटलर की खास आवाज व हावभाव (जैसे कंधे पर हाथ रखना) को पहचानकर असली हिटलर को तुरंत पहचान लिया था, हालाँकि यह कहानी ऐतिहासिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित नहीं है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस और एडोल्फ हिटलर की मुलाकात से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कहानीः-
उनके ‘हमशक्लों’ (Look-alikes) को पहचानने की है। यह घटना 29 मई 1942 की बताई जाती है, जब नेताजी जर्मनी के बर्लिन में हिटलर से मिलने गए थे।
असली हिटलर को पहचानने का किस्सा
लोकप्रिय कहानियों के अनुसार, जब नेताजी हिटलर के कार्यालय के बाहर इंतजार कर रहे थे, तब उनकी परीक्षा लेने के लिए हिटलर ने अपने हमशक्लों को उनके पास भेजा:
- पहली और दूसरी कोशिश: हिटलर का एक हमशक्ल कमरे में आया, लेकिन नेताजी ने उसकी तरफ देखा भी नहीं और अपनी किताब पढ़ते रहे।
- तीसरी कोशिश: एक दूसरा व्यक्ति आया और नेताजी से हाथ मिलाने के लिए हाथ बढ़ाया, पर नेताजी ने विनम्रता से मना कर दिया।
- असली हिटलर: अंत में जब असली हिटलर कमरे में आया और उसने नेताजी के कंधे पर हाथ रखा, तो नेताजी तुरंत खड़े हुए और कहा, “हिटलर!”।
- हैरानी: हिटलर हैरान रह गया और पूछा कि उन्होंने उसे कैसे पहचाना। नेताजी ने उत्तर दिया, “केवल असली हिटलर ही मुझ जैसे व्यक्ति के कंधे पर हाथ रखने का साहस कर सकता है”।
मुलाकात की अन्य प्रमुख बातें (1942)
- साहस और खरी बात: नेताजी एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने हिटलर की किताब ‘मीन कैम्फ’ (Mein Kampf) में भारतीयों के बारे में लिखी गई अपमानजनक बातों पर आपत्ति जताई और उन्हें सुधारने को कहा।
- उद्देश्य: उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे वहां राजनीतिक सलाह लेने नहीं, बल्कि भारत की आजादी के लिए सहायता मांगने आए हैं।
- परिणाम: हिटलर ने उन्हें पूर्ण समर्थन तो नहीं दिया, लेकिन वह नेताजी के व्यक्तित्व से प्रभावित हुआ और उन्हें जापान जाने के लिए एक पनडुब्बी (Submarine) उपलब्ध कराने में मदद की।
यह कहानी नेताजी के तेज दिमाग, आत्मविश्वास और निडरता का प्रतीक मानी जाती है। अधिक ऐतिहासिक विवरणों के लिए आप National Archives of India देख सकते हैं।

Nice 👍