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अंधविश्वास

फ़िद – साशा आज सुबह से ही मेरा बायीं आँख फड़क रहा है। लगता है कि आज मेरा साथ कुछ गलत होने वाला है।

साशा – अरे यार फ़िद इस आधुनिक युग में भी तुम इतने पुराने ख़्यालात के कैसे हो सकते हो। ये सब अंधविश्वास है इस पर तुम्हे ध्यान नहीं देना चाहिए।

फ़िद – साशा ये अंधविश्वास नहीं है हमारे बुजुर्गों द्वारा बताया गया दूरदर्शिता है जो हमेशा सत्य होता है।

साशा – नही समय के साथ पुराने लोगों ने इस अंधविश्वास को तोड़-मरोड़ के अफवाहें फैलायी हैं, किसी के आँख फड़कने से किसी का कुछ बिगड़ जायेगा भला इस चिज का क्या मतलब है।

हो सकता है कि कभी किसी का आँख फड़का हो और उसके साथ कोई अनहोनी हो गयी हो, तो वो बस एक संयोग ही होगा और लोग इसे जादू-टोना मानने लगे।

फ़िद – साशा चाहे जितना आधुनिकता आ जायें लेकिन हमारी संस्कृति में कुछ चिजें ऐसी है जो लोगों के संवेदनशिल भावना से जुङी है।
साशा – बीच में ही बात काटते हुए बोला, मैं इन सब चिजों को नहीं मानता हूँ।

दोनों फिर दैनिक जिवन के कार्यों में मशगुल हो गये।

आज फ़िद के बी.ए. का परिणाम भी आने वाला था, जिसमें फ़िद फेल हो गया।

फ़िद, साशा के तरफ सुबह के चर्चा में खुद को विजयी समझ सन्तोष भाव से निहार रहा था।

और साशा शक के निगाहों से फ़िद को देखता रहा।

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